Rajan tiwari

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तेरे ख़्वाब

कविता 221-2121-1221-212

आँखों से तेरे ख़्वाब निकाले न जाएंगे,
साँचे में किसी और के ढाले न जाएंगे//1

आ दिल पे रख दे हाँथ कि मुझको सुकूँ मिले,
जज़्बात मुझसे और सँभाले न जाएंगे//2

है खौफ़जदा हर कोई शीशे के शह्र में,
अब संग किसी ओर उछाले न जाएंगे//3

रौशन है मेरी रूह तुम्हारे जमाल से,
दिल से तो उम्र भर ये उजाले न जाएंगे//4

ऐलान ए हुक्मरां है न भूखा रहे कोई
मुंह मे किसी के पर ये निवाले न जाएंगे//5

उस आखिरी सफर पे तो जाना है एक दिन
ये फैसले अजल के हैं टाले न जाएंगे//6

'राजन' है कह रहा यही आईना टूटकर,
मुझसे भरम ये झूठ के पाले न जाएंगे//7

      राजन तिवारी 'राजन'
           इंदौर (म.प्र.)
        7898897777

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1 Comments

Daydreamer

19-Feb-2021 03:25 PM

Waooow sir ,hmesa ki trh

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